अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ वेद प्रकाश टंडन ने वेदों को स्कूली पाठयक्रम में बनाने की मांग की

दो दिवसीय ’अखिल भारतीय वेद विज्ञान सम्मेलन 2023’  का आयोजन संपन्न

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में ‘विश्व वेद परिषद, नई दिल्ली’ तथा ‘परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश’ के संयुक्त तत्वावधान में गत दिनों दो दिवसीय ’अखिल भारतीय वेद विज्ञान सम्मेलन 2023’  का आयोजन ‘सी. सुब्रह्मण्यम हॉल, पूसा संस्थान, नई दिल्ली’ में किया गया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न भागों से पधारे गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने सहभागिता की। विश्व के ज्ञान प्राचीनतम वेदों में विज्ञान निहित है, उसके विभिन्न पक्षों पर अनेक विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गये। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति में लोकसभा के अध्यक्ष श्री ओम बिड़ला जी ने किया। खचाखच भरे विशाल सभागार में समापन सत्र में ‘परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के अधिष्ठाता विश्वविख्यात संत स्वामी चिदानंद जी महाराज की अध्यक्षता में पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी, संघ के सह संपर्क प्रमुख श्री रामलाल जी, विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी जी, केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर टेकेश्वर कुमार भी उपस्थित थे।

इस मौके पर अंर्तराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव समिति’ के अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. वेद प्रकाश टंडन ने कहा कि ‘परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के अधिष्ठाता विश्वविख्यात संत स्वामी चिदानंद जी महाराज की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में मुझे सभी विद्वानों, शोधार्थियों तथा वेद प्रेमियों के अभिनंदन करते हुए अपनी बात कहने का अवसर प्राप्त हुआ।

इस दौरान डॉ. वेद प्रकाश टंडन ने अपने सम्बोधन में कहा कि मैं ‘अखिल भारतीय वेद विज्ञान सम्मेलन’ के इस गरिमामय मंच पर उपस्थित इस महायज्ञ के प्रणेता, विश्व विख्यात संत श्रद्धेय स्वामी चिदानंद जी महाराज, समारोह के मुख्य अतिथि भारत के महामहिम राष्ट्रपति  रहे हम सबके आदरणीय श्रीमान रामनाथ कोविंद जी, 22 में विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ॠतुराज अवस्थी जी, विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह संपर्क प्रमुख श्रीमान रामलाल जी, अनेक गुरुकुलों के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद जी, केन्द्रीय विश्वविद्यालय महेन्द्रगढ़ के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार जी तथा इस विशाल सभागार में देश के विभिन्न भागों से पधारे भारतीय संस्कृति के उन्नायक विद्वानों, विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों, वेदप्रेमियों का अभिनन्दन करता हूं।

डॉ. वेद प्रकाश टंडन ने कहा कि एक साथ चले, एक साथ बोले, सबके मन मिले का उद्घोष करने वाले वेद विश्व का प्राचीनतम लेकिन सर्वकालिक ज्ञान है। मनुर्भव का संदेश देने वाले वेद मानव संस्कृति का मूल है। आज अनेक समस्याओं से घिरे विश्व को अपने मूल की ओर लौटने की आवश्यकता है। सम्मेलन में हुआ संवाद हम सबके मन मस्तिष्क को परिष्कृत कर सजग, विवेकी, संवेदनशील विश्व नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है। डॉ. वेद्र पेकाश टंडन ने कहा कि अपनी वाणी को विराम देने से पूर्व मैं )ग्वेद के उस सूक्त की चर्चा करना चाहूंगा, जिस में कहा गया है – हे आदित्य के समान प्रकाशवान विद्वानों ! हमें ज्ञान और ऊर्जा प्रदान करो। जिससे हम और हमारी संतानों को आनंदमय दीर्घायु प्राप्त हो। इस वेद विज्ञान सम्मेलन में ऋषितुल्य विद्वानों के उद्बोधन वास्तविक ज्ञान और ऊर्जा प्रदान करने वाले है। ऐसे सम्मेलनों के माध्यम से वेदों का संदेश जन जन तक पहुंचेगा।

डॉ. वेद प्रकाश टंडन ने कहा कि हम सब के सौभाग्य से देश को श्रीमान नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री के रूप में प्राप्त हुए हैं, जिनके एक प्रयास से योग भारत से विश्व के कोने-कोने में फैल गया। आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मोदी जी के नेतृत्व में भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा जिसमें बहुत बड़ी भूमिका वेद विज्ञान की होगी। आज जब इस मंच पर अनेक महत्वपूर्ण विभूतियां उपस्थित है, मैं सभी से यह आग्रह करना अपना कर्तव्य समझता हूँ कि वेदों का ज्ञान हमारे स्कूली पाठयक्रम का अंग बनाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि मैं एक बार पुनः मंचासीन विभूतियों पूज्य स्वामी जी, विश्व वेद परिषद और परमार्थ निकेतन के समस्त संतों विद्वानों तथा इस सम्मेलन के सुचारू संचालन में अपना महत्वपूर्ण योगदान करने वाले प्रोफेसर धर्मेंद्र शास्त्री की और डॉक्टर देवेश प्रकाश जी सहित सभागार में उपस्थित सभी वेद प्रेमियों को प्रणाम करता हूँ।

-हर्ष कुमार-

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