geeta

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सम्पूर्ण मानव जाति का अतर्क शास्त्र गीता ही है। सभी मानव के अंतरकरण में देवी व आसुरि शक्तियाँ अनादि काल से हैं।

देवी शक्तियों के सहयोग से जब मनुष्य अपने आत्मस्वरूप की ओर अग्रसर होता है तो काम, क्रोध, राग, द्वेष इत्यादि आसुरि वृतियां बाधा के रूप में आक्रमण करती हैं। उसमें पार पाना ही वास्तिविक युद्ध है। अर्जुन श्रेय के लिए विकल था। वह युद्ध करना तो चाहता था परन्तु उसके लिए उसे अपने कुल के लोगों पर बाण कैसे चलाये इस विचार से संशय में था।

इसीलिए भगवान को 18 अध्याय गीता समझानी पड़ी। उसके पश्चात भगवान ने पुछा की कुल के प्रति तेरा मोह भंग हुआ के नहीं तब अर्जुन ने स्वीकार किया की हाँ अब मेरा मोह कुल के प्रति भंग हो गया है। अब में वैसा ही करूँगा जैसा कि भगवान ने उपदेश दिया है।

यह मानव मात्र की शंका है

ये केवल अर्जुन की शंका नहीं थी यह मानव मात्र की शंका है कि श्रेय क्या है उसे कैसे प्राप्त किया जाये। इसलिए स्त्री-पुरुष, बाल, वृद्ध सभी को गीता के 18 अधयाय का पाठ करना परम आवश्यक है इसके ज्ञान के बिना मानव कल्याण की कल्पना करना व्यर्थ है।

गीता के ज्ञान से बच्चों में भी कल्याण कारी संस्कारों का सृजन होता है। इस गीता ज्ञान के बिना कोई भी मनुष्य ईश्वर के पथ पर नहीं चल सकता इसके नियमित श्रवण से परिवार तथा सम्पूर्ण जगत को सुसंस्कृत करें। संसार में मनुष्य कहीं भी हो उसको गीता की अमृतवाणी को ग्रहण करना चाहिए।

हे अर्जुन ! मैं भूत, वर्तमान और भविष्य के सभी प्राणियों को जनता हूं , किन्तु वास्तविता में मुझे कोई नहीं जानता।

Geeta Gyan

Geeta Updesh भगवान सिर्फ वहां नहीं है जहाँ हम पूजते हैं,

भगवान तो वहां भी हैं जहाँ सब पाप करते हैं।

Geeta Gyan

Bhagavad Gita तुम क्यों व्यर्थ में चिंता करते हो ? तुम क्यों भयभीत होते हो ?

कौन तुम्हें मार सकता है ? आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही इसे कोई मार सकता है,

ये ही जीवन का अंतिम सत्य है।

Geeta Updesh

Bhagavad Gita कर्म ही धर्म है इसलिए हमें कर्म करते जाना चाहिए

फल अपने आप हमें मिलेगा यही संसार का नियम है।

Geeta Updesh कर्म ही धर्म है

Bhagavad Gita न तो यह शरीर तुम्हारा है और न ही तुम इस शरीर के मालिक

हो, यह शरीर 5 तत्वों से बना है – आग, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश, एक दिन यह

शरीर इन्हीं 5 तत्वों में विलीन हो जायेगा।

Geeta Updesh न तो ये शरीर तुम्हारा है

Bhagavad Gita तुमने खुद को कमजोर मान रखा है, वरना जो तुम कर सकते

हो वो दूसरा नहीं कर सकता।

Geeta Updesh
Geeta Updesh तुमने खुद को कमजोर मान रखा है

Bhagavad Gita जब तक तुम डरते रहोगे तब तक तुम्हारे जीवन का निर्णय

दूसरे लोग लेते रहेंगे।

Geeta Updesh जब तक तुम डरते रहोगे

Bhagavad Gita अगर आप किसी को छोटा देख रहे हो तो आप उसे

या तो दूर से देख रहे हो या अपने भीतर के अहंकार से।

Geeta Updesh अगर आप किसी को छोटा देख रहे हो

Bhagavad Gita तेरा मेरा, छोटा बड़ा अपना पराया मन से मिटा दो

फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।

Geeta Updesh तेरा मेरा छोटा बड़ा

शरीर जल से पवित्र होता है, मन सत्य से, बुद्धि ज्ञान से, आत्मा धर्म से

गीता उपदेश by hindisanskaran

जीवन में कष्ट कभी कम हुए ही नहीं, बल्कि आप सीख गये की उनके साथ समय कैसे व्यतीत करना है।

Geeta samvad Geeta Updesh

हे पार्थ ! जन्म लेने वाले प्राणी की मृत्यु उतनी ही निश्चित है, जितना हर व्यक्ति का

जन्म निश्चित है इसलिए हे पार्थ जो निश्चित है उस पर शोक मत करो।

Geeta Updesh janam and Mirtyu

हे पार्थ ! जो बीत गया उस पर विलाप कैसा जो है उस पर अहंकार कैसा? जो आने वाला है उसका मोह कैसा ?

geeta Gyan moh

मुर्ख ज्ञानियों से भी नहीं सीख पाते और ज्ञानी मुर्ख से भी सीख लेते हैं।

Geeta Gyan in Hindi

तू करता वही है जो तो चाहता है परन्तु होता वही है जो मैं चाहता हूँ।

तू वही कर जो मैं चाहता हूँ फिर होगा वही जो तू चाहता है।

Geeta Updesh in Hindi Image

मित्रता आवश्यक है सम्बन्ध भी आवश्यक है, परन्तु जीवन की हर कठिन परिस्तिथि यह

दर्शाती है की अकेले रहने की कला का आना भी परम आवश्यक है।

गीता उपदेश हिन्दी सार

परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है इसलिए जो पीछे छूट गया उस पर शोक मनाने

की जगह जो आपके पास है उसका आनंद उठाना सीखिए।

bhagwat geeta

जीवन की समानता को पहचानें और अपनायें अर्थात बिना दुःख के सुख का मूल्य नहीं समझ सकते

जिसने केवल सुख भोगा हो उसके लिए दुःख पहाड़ के सामान है।

geeta gyan

डर का सामना डटकर करो अथार्त मन से कभी हार मत मानो,

अपने आप पर विश्वास करो और आखिरी दम तक लड़ो

Geeta Updesha

भूतकाल की चिंता छोड़ें भविष्य के लिए भयभीत न हों

वर्तमान पर ध्यान दो भविष्य अपने आप सुखी हो जायेगा।

geeta
Shrimad Bhagavad Gita
मनुष्य जो चाहे बन सकता है, यदि वह विश्वास के साथ 
इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करें।
Geeta Updesha
गीता उपदेश इन belive

काम, क्रोध और लोभ ये मनुष्य को नरक की ओर ले जाने वाले तीन द्वार हैं।

इसलिए इन तीनों का त्याग कर देना चाहिए।

geeta updesh three things discard

मनुष्य के दुःख का कारण उसका प्रेम ही है, वह जितना अधिक

मोह करेगा उतना अधिक कष्ट भी भोगेगा।

#geetaupdesha
gita updesha

जो आरम्भ में विष के सामान प्रतीत होता है लेकिन अंत में
अमृत के तुल्य है इसलिए वह परमात्मविषय बुद्धि के
प्रसाद से उत्पन्न होने वाला सुख सात्विक कहलाता है।

गीता ज्ञान

*श्री दुर्गा माँ*  के 108 नाम 

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