Om Sankirtan

Om Sankirtan Mantra

ॐ ओ३म्-संकीर्तन
Om sankirtan Mantra

Om Sankirtan 108

  1. अनन्त-गुणगण-भूषित ओ३म्।।

ओम् अनन्त गुणों से भूषित (युक्त ) है।

2. शुद्धब्रह्म-परात्पर ओ३म्।।

ओम् प्राकृति से भिन्न “शुद्ध ब्रह्म” और सूक्ष्म से भी सूक्ष्म है।

3. शबलब्रह्म-सुनामक ओ३म्।।

ओम् प्रकृति के साथ ” शबल ब्रह्म” कहलाता है।

4. कालात्मक-परमेश्वर ओ३म्।।

ओम् काल स्वरुप है और परम सामर्थ्यवान् है।

5. प्रलयानन्तर-सुस्तिथ ओ३म्।।

प्रलय के बाद भी ओम् की वैसी ही सता बनी रहती है।

6. ईक्षितसृष्टि-विधायक ओ३म्।।

ओम् अपनी ईक्षण सामर्थ्य (इच्छा शक्ति) से सृष्टि को बनाता है।

7. व्यापकयज्ञ-प्रसारक ओ३म्।।

ओम् सारे विश्व में व्यापत यज्ञ का प्रसारक है।

8. लोकाखिल-गति-दायक ओ३म्।।

ओम् समस्त लोको को गति देने वाला है।

9. जगन्नियन्ता-पालक ओ३म्।।

ओम् परमेश्वर जगत、को नियंत्रण में रखने वाला और पालन करने वाला है।

10. जनता दुःख-प्रभञ्जक ओ३म्।।

ओम् जन-जन के दुःखों को नष्ट करने वाला है।

11. भक्तप्रिय-सुख-दायक ओ३म्।।

भक्तों का प्रिय है और उन्हें सुख देने वाला है।

12. सुर्यदिक-धूतीधारक ओ३म्।।

ओम् ज्योतिस्वरूप परमात्मा सूर्यादि ज्योतिर्मय पदार्थों को धारण करने वाला है।

13. परमसहायक-प्रियवर ओ३म्।।

ओम् सबसे बड़ा सहायक है और सबसे प्रिय है।

14. नित्यतृप्त-सर्वाश्रय ओ३म्।।

ओम् सदा ही तृप्त रहता है और सबका आश्रय है।

15. ज्ञानरूप-सत्प्रेरक ओ३म्।।

ओम् ज्ञान स्वरुप है और सत्प्रेरणा देने वाला है।

16. सकलद्रव्य-व्यापक ओ३म्।।

यह ओम् सभी पदार्थो में व्यापक है।

17. श्रोत्रादीनिद्र्य-शक्तिद ओ३म्।।

ओम् कान आदि सभी इन्द्रयों को शक्ति देने वाला है।

18. कर्माश्रित-फल-दायक ओ३म्।।

ओम् कर्मानुसार सबको फल देने वाला है।

19. अदभुततेजो-बलयुत ओ३म्।।

ओम् अलौकिक तेज और बल से युक्त है।

20. श्रेय: प्राप्ति-सुसाधक ओ३म्।।

ओम् सुख और मोक्ष की प्राप्ति में साधक का सहायक है।

21. हर्षित-मतिसंदायक ओ३म्।।

ओम् हर्षित रहकर भक्तों को अच्छी बुद्धि देने वाला है।

22. मातृप्रेम-परिपोषक ओ३म्।।

ओम् माता की तरह से प्रेम और पोषण करने वाला है।

23. स्नेहद्रित-पितृपालक ओ३म्।।

ओम् स्नेह से भरे हुए पिता के समान पालक है।

24. व्याहृति-लोक-विभाजक ओ३म्।।

‘भू:’ आदि व्याहृतियों के अनुसार लोकों का विभाजक ओम् ने ही किया है।

25. सकल-ऋद्धि-सिद्धि-प्रद ओ३म्।।

ओम् सभी प्रकार की ऋद्धि और सिद्धि (सफलता ) को देने वाला है।

26. वेदचतुष्टय-दायक ओ३म्।।

चारों वेदों का ज्ञानी इसी ओम् परमात्मा ने दिया है।

27.अग्न्यादिक-ऋषिपूजित ओ३म्।।

अग्नि आदि (वायु, आदित्य और अंगिरा ) ऋषियों ने इसी ओम् की पूजा की है।

28. साधन-साध्य-समुच्चय ओ३म्।।

ओम् साधन भी है और साध्य भी है।

29. प्राणदक्ष-संदायक ओ३म्।।

ओम् स्वयं प्राणशक्ति से सम्पन्न और सबको प्राणशक्ति देने वाला है।

30. इन्द्र-बृहस्पति-नामक ओ३म्।।

ओम् का नाम ही इन्द्र और बृहस्पति है।

31. ऋतुपरिवर्तन-कारण ओ३म्।।

ओम् ऋतुओं में परिवर्तन का चेतन कारन है।

32. ऋतुमूलक-हितदायक ओ३म्।।

यही ओम् ऋतुओं के द्वारा मानवमात्र को सुख देने वाला है।

33. ज्ञानसूर्य-विस्तारक ओ३म्।।

इसी ओम् ने वेदज्ञान रूपी सूर्य के प्रकाश को फैलाया है।

34. सुर-संपूजित-सुरवर ओ३म्।।

ओम् ही सर्वश्रेष्ठ देवता है और सभी देवगण इसकी पूजा करते हैं।

35. सत्संकल्प-प्रपूरक ओ३म्।।

ओम् ही सारे अच्छे संकल्पों को पूरा करता है।

36. धर्माधर्म-सुशिक्षक ओ३म्।।

ओम् ही धर्म और अधर्म की शिक्षा देने वाला है।

37. जन्मरहित-जन्मप्रद ओ३म्।।

ओम् का जन्म नहीं होता, पर वह सभी को जन्म देता है।

38. देवादिक-ऋणमोचक ओ३म्।।

ओम् ही देव ऋण आदि ऋणों से मुक्त कराने वाला है।

39. कलेश-विमुक्त-विशेषण ओ३म्।।

ओम् अविधा आदि कलेशों से रहित विशेषण वाला है।

40. स्नायुरहित-सुखपूरक ओ३म्।।

ओम् नस-नाड़ी आदि के बंधनों से रहित, सुखस्वरूप है।

41. दैहिकरोग-निवारक ओ३म्।।

ओम् शरीर के सभी रोगों का निवारण करता है।

42. तनुपालक -दीर्घायुद ओ३म्।।

ओम् सबके शरीरों का पालन-पोषण करने वाला और दीर्घायु देने वाला है।

43. आत्मिकबल-संदायक ओ३म्।।

ओम् आत्मिक बल देने वाला है।

44. मानवलक्ष्य-महाश्रय ओ३म्।।

ओम् मानव के लक्ष्य ‘मोक्ष’ का सबसे बड़ा आश्रय है।

45. नित्यनिरंजन-निरुपम ओ३म्।।

ओम् नित्य, निर्विकार और अनुपम है।

46. भवभय-भंजन-भेषज ओ३म्।।

जनम-मरण के भय का नाश करने वाली एकमात्र औषिधि ओम् ही है।

47. आर्त-त्राण-परायण ओ३म्।।

दुःखियों का रक्षण एवं सर्वोत्कृष्ट आश्रय ओम् ही है।

48. अज्ञानादिक-रिपुहर ओ३म्।।

अज्ञान आदि शत्रुओं को नष्ट करने वाला ओम् ही है।

49. दारिद्रयादि-विनाशक ओ३म्।।

दरिद्रता आदि को विनष्ट करने वाला ओम् ही है।

50. परमैश्वर्य-सुदायक ओ३म्।।

परम ऐश्वर्य को देने वाला ओम् ही है।

51. सर्वानन्द-सुसाधक ओ३म्।।

सबके आनन्द को सिद्ध करने वाला ओम् है।

52. साम्राज्यार्क-प्रसारक ओ३म्।।

ओम् शांति-सुख के साम्राज्य सूर्य को फैलाने वाला है।

53. विश्वविनोदक-विभुवर ओ३म्।।

ओम् विश्व को आनन्द देने वाला और सर्वव्यापक है।

54. उद्बोधित-हृद्वर्द्ध् क ओ३म्।।

ओम् उद्बोधन देकर हृदय के उत्साह को बढ़ाता है।

55. निर्मलनायक-शर्मद ओ३म्।।

ओम् निर्मल है, सबको सही रास्ते पर ले जाने वाला और सुख देने वाला है।

56. लोभादिक-रिपुनाशक ओ३म्।।

लोभ आदि शत्रुओं का नाशक ओम् ही है।

57. तेज:प्रद-तेजोमय ओ३म्।।

ओम् स्वयं तेज: स्वरूप है और सबको तेज देने वाला है।

58. ओज:प्रद-ओजोमय ओ३म्।।

ओम् स्वयं ओज-स्वरूप है और सबको ओज देने वाला है।

59.श्रद्धाप्रद-श्रद्धामय ओ३म्।।

ओम् स्वयं श्रद्धास्वरूप है और सबमें श्रद्धा उत्पन्न करने वाला है।

60. रसवाहक-सर्वेश्वर ओ३म्।।

ओम् औषधि-वनस्पतियों में रस भरने वाला और सबका ईश्वर है।

61. दानसृष्टि-संचालक ओ३म्।।

ओम् सृष्टि का दान देकर उसका संचालन कर रहा है।

62. रसभेदक-संवर्द्धक ओ३म्।।

ओम् फूलों-फलों में भिन्न-भिन्न प्रकार के रस भरने वाला और उनमें रास बढ़ाने वाला है।

63. पापनिवारक-मोक्षद ओ३म्।।

ओम् पापों का निवारक करके मोक्ष प्रदान करता है।

64. मृत्युरूप-संशोधक ओ३म्।।

ओम् मृत्यु के पश्चात् नया जन्म देकर संशोधन करता है।

65. चित्र-विचित्र-महातुथ ओ३म्।।

ओम् अत्यन्त अदभुत और महान सत्य है।

66. सत्य-सनातन-धर्मद ओ३म्।।

ओम् सत्य सनातन वैदिक धर्म-प्रदाता है।

67.होमाप्रित-हविभेदक ओ३म्।।

ओम् हवन में दी गयी आहुतियों को छिन्न-भिन्न (सूक्ष्म) करके सब जगह फैला देता है।

68. सभ्य-सभा-प्रतिभाप्रिय ओ३म्।।

ओम् स्वयं सभ्य और सभा में प्रतिभावान लोगों का प्रिय है।

69. विस्तृत-शांति-विधायक ओ३म्।।

ओम् व्यापक शांति का विधान करने वाला है।

70. वरुण प्रजापति-प्रेरक ओ३म्।।

ओम् परमात्मा वरुण, प्रजाति और सबका प्रेरक है।

71. स्थावर-जंगम-रक्षक ओ३म्।।

ओम् स्थावर (जड़) और जंगम (चेतना ) सभी की रक्षा करने वाला है।

72. विद्ज्जन-मतिप्रेरक ओ३म्।।

ओम् विद्वानों की बुद्धियों को प्रेरणा देता है।

73. विक्रम-विष्णु-विराडसि ओ३म्।।

हे ओ३म् ! आप महान पराक्रमी, विष्णु (सब जगह व्यापक) और विराट है।

74. दानरहित-नरनाशक ओ३म्।।

ओम् दान न देने वाले मनुष्य को नष्ट कर देता है।

75. त्यागयुक्त-नर-भद्र्द ओ३म्।।

ओम् त्याग बुद्धि वाले मनुष्यों का सब प्रकार कल्याण करता है।

76. मन्युरूप-मन्युप्रद ओ३म्।।

ओम् दूसरों के हित के लिए मन्यु (क्रोध) करने वाला और सब को मन्यु देने वाला है।

77. वीर्यरूप-वीर्यप्रद ओ३म्।।

ओम् स्वयं वीर्यरूप होकर भक्तों में वीरता लाने वाला है।

78. सहनरूप-सहदायक ओ३म्।।

ओम् स्वयं सहनशील और भक्तों को भी सहनशक्ति देता है।

79. अचलरूप-संचालक ओ३म्।।

ओम् प्रभु स्वयं अचल होकर भी सभी को चला रहा है।

80. रूद्र-भीम-भयवाहक ओ३म्।।

ओम् रुद्ररूप और पापियों के मन में भयानक भय पैदा करता है।

81. सज्जन-सम्मत-सौख्यद ओ३म्।।

ओम् सज्जन लोगों के अनुकूल है और उनको सुख देता है।

82. वर्णचतुष्टय-स्थापक ओ३म्।।

ओम् ब्राह्मण आदि चारों वर्णों का विधान करने वाला है।

83. सर्वन्यून-संपूरक ओ३म्।।

ओम् स्वयं पूर्ण ईश सबकी कमियों को पूरा करने वाला है

84. विेद्षादिक-भंजक ओ३म्।।

ओम् देव्ष आदि दुगुणों को नष्ट करने वाला है।

85. सर्वमित्र-संपादक ओ३म्।।

ओम् सबसे मित्रता करने वाला और सबको मित्र बनाने वाला है।

86. सृष्टि-स्तिथि-लयकारक ओ३म्।।

ओम् संसार की रचना, पालन तथा प्रलय करता है।

87. क्षोभ-रहित-नभनामक ओ३म्।।

ओम् क्षोभ से रहित और आकाश नाम वाला है।

88. मंगलमूल-मयोभव ओ३म्।।

ओम् सभी प्रकार के मंगल (कल्याणों) का मूल कारण और सुखस्वरूप है।

89. शंकररूप-मयस्कर ओ३म्।।

शंकररूप (मंगलकारी) ओम् सबको सुख देने वाला है।

90. वष्टुधियावसु-रसवित ओ३म्।।

ओम् कामनाएँ पूर्ण करने वाली रसवित बुद्धि को देने वाला वसु है।

91. सत्पथदर्श-पुरोहित ओ३म्।।

सत्यस्वरूप ओम् प्रभु सत्य (अच्छा) मार्ग दिखाने वाला पुरोहित है।

92. नाशनिवारक-स्वस्तिद ओ३म्।।

ओम् नाश का निवारण करके सबका शुभ करता है।

93. सकलयज्ञ-स्वीकारक ओ३म्।।

ओम् सभी प्रकार के यज्ञों को स्वीकार करने वाला है।

94. उक्षित-रक्षक-ओ३म्।।

ओम् गर्भ में स्थित बच्चे की रक्षा करने वाला तथा शिक्षा देने वाला है।

95. विश्वरूप-विश्वावसु ओ३म्।।

ओम् स्वयं विश्वरूप है समस्त विश्व उसके अंदर बसा है।

96. विश्वमित्र-विश्वावसु ओ३म्।।

ओम् स्वयं विश्वरूप है समस्त विश्व उसके अंदर बसा है।

97. पुण्य-पुरूतम-पूरूष ओ३म्।।

ओम् महान पुण्यशील, सर्वश्रेष्ठ और विराट पुरूष है।

98. पहिनिरन्तर-पूषण ओ३म्।।

हम सबका सदा पोषण करने वाले हैं पोषण ओम् ! हमारी रक्षा कीजिए।

99. पाहिप्रवाहण-प्रभुवर ओ३म्।।

हे ओम् हमारे नोकारुप श्रेष्ठ परमेश्वर, आप हमारी रक्षा कीजिए।

100. अदभुत मित्र-कृपाकर ओ३म्।।

ओम् सबका अदभुत मित्र और कृपा करने वाला है।

101. मित्ररूप-व्रतपालक ओ३म्।।

ओम् मित्ररूप होकर स्वयं व्रत का पालन करता और दूसरों से करवाता है।

102. निश्चितमित्र-निराश्रय ओ३म्।।

ओम् एकमात्र सबका निश्चित रूप से मित्र है। ओम् को किसी के आश्रय की आवश्यकता नहीं है।

103. अधमोद्धारक-चिन्मय ओ३म्।।

ओम् अधर्मों का उद्धार करने वाला चैतन्यस्वरूप है।

104. सत्य-सुखात्मक-सर्वद ओ३म्।।

ओम् सत्य, सुख स्वरुप और सबको सुख देने वाला है।

105. निर्गुणरूप-निरामय ओ३म्।।

हे ओम् ! आप प्रकृति के सत्त्व, राज्य और तम गुणों से रहित निगुण और रोगों से रहित हैं।

106. आनन्दामृत-वर्षक ओ३म्।।

ओम् आनन्दरूपी अमृत की वर्षा करने वाला है।

107. गणनायक-गणपालक ओ३म्।।

ओम् गणनायक (सबका नेता) और सबका पालक है।

108. मर्माछादक-विभुवर ओ३म्।।

हे ओम् ! आप मेरे हृदय, प्राण आदि मर्मस्थलों की रक्षा करने वाले, श्रेष्ठ और विभु हैं।

अनन्त-गुणगण-भूषित ओ३म्।।

शुद्धब्रह्म-परात्पर ओ३म्।।

अनन्त-गुणगण-भूषित ओ३म्।।

शुद्धब्रह्म-परात्पर ओ३म्।।

ओ३म् शान्ति: शान्ति: शान्ति:

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101 Good Morning Quotes in Hindi

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